मनोज शर्मा /संवाददाता गुना -राजगढ़
गुना/मक्सूदनगढ़
मधुसूदनगढ़ के ऐमना खेड़ी गांव में पंडित शिवदयाल भार्गव पीपल खेड़ी वालों के मुखारविंद से चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन गादीपीठ से पंडित जी ने प्रवचन करते हुए बताया कि सुखदेव महाराज ने परीक्षित को बताया कि राजन हमें जीवन में जो भी कार्य करने चाहिए जिम्मेदारी मिले उस कार्य को हमें सेवा बात समझ कर करना चाहिए क्योंकि सेवा में समर्पण आ जाता है समर्थन में ही पवित्रता होती है सुखदेव जी कहते हैं कि हे राजन् जिस समय महाराज को हिरनी का बच्चा दिखा तो उसके मन में उस हिरनी शावक के प्रति ममता का भाव पैदा हो गया उनके मन में यह भाव आ गया कि अब मैं ही इसका रखवाला हूं इस अवस्था में उनका सेवा भाव समाप्त हो गया और स्वामी भाव उत्पन्न होने से ममता हो गई आज वर्तमान में हमारी स्थिति यही है कि हमें हमारे मन में सेवा का भाव दूर होता जा रहा है एवं करता पन का भाव आ गया है अहंकार आ गया है जो कर रहा हूं मैं कर रहा हूं यही भाव हमें कर्तव्य से दूर कर रहा है इस बात से हमें दूर रहना चाहिए चित्रगुप्त जी की कथा में के माध्यम से सुखदेव जी कहते हैं कि राजन जी के पुत्र की मृत्यु हो गई तो उनके वियोग में राजा एवं रानी दोनों रोने लगे एवं पागल से हो गए उस समय नारद जी ने चित्रकूट जी से कहा कि यह शरीर नहीं है केवल साधन है जिसका हमें सदुपयोग करना चाहिए यह शरीर नश्वर है मिट्टी का पुतला है प्रह्लाद के चरित्र के माध्यम से उन्होंने कहा कि कितनी भी प्रतिकूल परिस्थिति आ जावेकिंतु हमें भगवान का भजन नहीं छोड़ना चाहिए हिरणकश्यप द्वारा प्रह्लाद को घनघोर कष्ट दिया गया किंतु भक्त प्रह्लाद ने भगवान का भजन नहीं त्यागा और अंत में भगवान नरसिंह द्वारा हिरण कश्यप का वध किया इस अवसर पर आयोजक पूर्व मंडी अध्यक्ष पटेल विजय सिंह गुर्जर ,बरखेड़ी देव के पण्डा श्री दशरथ सिंह, बजंला पटेल बुंदेल सिंह गुर्जर एवं ग्रामीणों सहित आसपास के हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे जानकारी सत्यपाल सिंह मक्सूदनगढ़ ने दी।