सत्य का मार्ग आकाश जैसा है!!

सत्य का मार्ग आकाश जैसा है!!
पक्षी उड़ते हैं लेकिन कोई पदचिन्ह नहीं छोड़ते। तुम उनका अनुसरण नहीं कर सकते। वहाँ कोई पदचिन्ह नहीं है।
आंतरिक आकाश ठीक ऐसा ही है, और प्रत्येक को अपना स्वयं का मार्ग ढूँढना होगा।
अच्छा होगा यह कहना कि नया मनुष्य अपने स्वयं का मार्ग बनाएगा। वह तैयार मार्ग पर नहीं चलेगा। हिन्दुत्व, ईसाइयत, यहूदी तैयार मार्ग हैं, सुपर हाईवे हैं, सुविधाजनक। लेकिन वे कहीं नहीं पहुँचते। वे पृथ्वी के चारों तरफ गोल-गोल घूमते हैं। तुम उन पर लाखों जन्मों तक चल सकते हो, और तुम कभी भी अपनी स्वयं की चेतना तक नहीं पहुँचोगे, क्योंकि वह तुमसे गहरे नहीं जुड़ा था।
सच्चा खोजी, जो कि नया मनुष्य होगा, इन सभी तैयार मार्गों से बाहर आ जाता है। वह अज्ञात की तरफ चलता है। यह अद्भुत रोमांच है, परम आनंद है।


।।ओशो।।