*सत्य ओर शास्त्र...।।।*
नसरुद्दीन का बेटा फजलू स्कूल से चार नये शब्द सीख आया- *दारू, हुक्का, रंडी और उल्लू का पट्ठा*
वह बारंबार इनके अर्थ पूछे। इस डर से कि कहीं बेटा बिगड़ न जाए,
नसरुद्दीन ने दारू का अर्थ चाय,
हुक्का का अर्थ काफी,
रंडी यानी भिंडी की सब्जी, और उल्लू का पट्ठा यानी मेहमान बतला दिया।
दूसरे ही दिन एक विचित्र घटना घटी,
जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। फजलू बाहर बरामदे में बैठा था, तभी नसरुद्दीन का कोई परिचित उससे मिलने आया।
फजलू ने कहा, आओ उल्लू के पट्ठे,
कुर्सी पर बैठो।
मित्र तो यह सुन कर हैरान रह गया।
बोला, तुम्हारे पापा कहां गए?
फजलू ने कहा, पापा?
अरे वे बाजार गए हैं रंडी खरीदने।
आजकल उन्हें रंडी बहुत भाती है।
वे आते ही होंगे।
फजलू ने अपने नये शब्द-भंडार का उपयोग करने का अच्छा अवसर देख कर कहा, आप हुक्का पीना पसंद करते हैं या दारू लेकर आऊं?
वह मित्र तो यह सुन कर हक्का-बक्का रह गया, घबड़ाते हुए बोला, फजलू, कैसी उलटी-सीधी बातें कर रहे हो तुम? तुम्हारी मम्मी कहां हैं? उन्हीं को बुला कर लाओ। तब तक पापा भी आते होंगे।
फजलू ने दरवाजे के भीतर झांक कर आवाज लगाई, मम्मी, एक उल्लू का पट्ठा आया है। मैंने हुक्का-दारू की पूछी तो कुछ नहीं बोला। कहता है उलटी-सीधी बातें मत करो; जब तक पापा रंडी वगैरह लेकर नहीं आते, तब तक तुम्हारी मम्मी को ही बुला दो।
शास्त्रों से तुमने जो सीखा है बस ऐसा ही है--बड़ा दूर, सत्य से बहुत दूर, हजार-हजार कोस दूर। पंडितों से तुमने जो सुना है वह ऐसा ही है। वह असत्य तो हो सकता है, सत्य नहीं हो सकता।
क्योंकि सत्य तो केवल उसके पास उपलब्ध हो सकता है जिसे उपलब्ध हो। सत्य तो सत्संग में मिलता है--अध्ययन में नहीं, मनन में नहीं, चिंतन में नहीं--ध्यान में मिलता है।
सत्य तो सदगुरु में डुबकी लगाने से मिलता है।
- ओशो...🌹