*सीखने की प्रक्रिया है--जीवन* ओशो🌹🌹🌹🌹🌹

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*सीखने की प्रक्रिया है--जीवन*

▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬युवक से अर्थ हैः ऐसा मन जो सीखने को सदा तत्पर है--ऐसा मन जिसे यह भ्रम पैदा नहीं हो गया है कि जो भी जानने योग्य था, वह जान लिया गया है--ऐसा मन जो बूढ़ा नहीं हो गया है और स्वयं को रूपांतरित और बदलने को तैयार है। बूढ़े मन से अर्थ होता है ऐसा मन जो अब आगे इतना लोचपूर्ण नहीं रहा है कि नये को ग्रहण कर सके, नये का स्वागत कर सके। बूढ़े मन का अर्थ हैः पुराना पड़ गया मन। उम्र से उसका भी कोई संबंध नहीं है। आदमी के शरीर की उम्र होती है, मन की कोई उम्र नहीं होती है। मन की दृष्टि होती है, धारणा होती है।
स्वामी रामतीर्थ की उम्र मुश्किल से तीस वर्ष थी और वे हिंदुस्तान के बाहर गए। पहली बार उन्होंने जापान की यात्रा की। वे जिस जहाज पर सवार थे उस जहाज के डेक पर एक जर्मन बूढ़ा जिसकी उम्र कोई नब्बे वर्ष होगी; जिसके हाथ-पैर कंपते थे, जिसे चलने में तकलीफ होती थी, जिसकी आंखें कमजोर पड़ गई थीं, वह चीनी भाषा सीख रहा था।चीनी भाषा जमीन पर बोली जाने वाली कठिनतम भाषाओं में से एक है। ......
रामतीर्थ परेशान हो गए उसको देख-देख कर, परेशान हो गए और वह सुबह से शाम तक सीखने में लगा हुआ है। नहीं, बरदाश्त के बाहर हुआ तो उन्होंने तीसरे दिन उससे पूछा कि क्षमा करें, आप इतने वृद्ध हैं, नब्बे वर्ष पार कर गए मालूम पड़ते हैं, आप यह भाषा सीख रहे हैं, यह कब सीख पाएंगे? कब बच पाएंगे आप सीखने के बाद, कब इसका उपयोग करेंगे?
उस बूढ़े आदमी ने आंखें ऊपर उठाईं और उसने कहाः तुम्हारी उम्र कितनी है? रामतीर्थ ने कहाः मेरी उम्र कोई तीस वर्ष होगी। वह बूढ़ा हंसने लगा और उसने कहा, मैं तब समझ पाता हूं कि हिंदुस्तान इतना कमजोर, इतना हारा हुआ क्यों हो गया है। उस बूढ़े ने कहाः जब तक मैं जिंदा हूं और मर नहीं गया हूं और जब तक जिंदा हूं तब तक कुछ न कुछ सीख ही लेना है; नहीं, तो जीवन व्यर्थ हो जाएगा। ....जीवन का अर्थ हैः नये का रोज-रोज अनुभव। जिसने नये का अनुभव बंद कर दिया है वह मर चुका है, उसकी मृत्यु कभी की हो चुकी....... 💃